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मत बांधो ॥ मत बांधो
मेरे तारीफोके पुल....!
तुम्हारी तारिफोसे
हो जाऐगी मेरी बत्ती गुल..!
मत बांधो, मत बांधो मेरे तारिफो के पुल.!
हो जाऐगी अगर मुझसे कोई भुल
तो मेरी किस्मत की चाभी हो जाऐगी गुल.!
कभी बरसाओगे तुम मुझपर तारीफो के फुल
कभी गलती अगर हो जाएगी तो मेरा अस्तित्व जावोगे भुल
मै तो याचक हु
प्रेम का भुखा
द्वार आपके खडा झोली फैलाये हु खडा
मत बांधो मत बांधो मेरे तारिफो के पुल..!
मोहन सोमलकर
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