मोहन सोमलकर

मोहन सोमलकर कवी कवयत्री समुह लिपीनाते जपणारी शब्दांच्या पलीकडली माणसे जोपासती हेची काव्य पुष्प.

शुक्रवार, ७ जानेवारी, २०२२

किमत ही कुछ ऐसी थी..!

 


भगवान मुझसे मेरी किमत बता दे तु..

मेरी इस दुनियाॅ मे जगहा कहा है बता दे तु...!


कई आए चेहरे मेरे सामने हसाते गये मुझको कभी

उन चेहरे का हु शुक्रगुजार मुझे जिने का मतलब बता कर चल दिये


ये जमी साथ थी , आसमा न डगमगा 

मेरी राह पर फुल बिछाये जिसने वो मेरे लिए जगा..!


जो मिले दिये रोशनी के ,मेरे लिए जगे

वो लव दिये की बुझी नही ,जल उठी रोशनी के लिए...!


मोहन सोमलकर 🍅🍎🍎🍎🍎

६ टिप्पण्या:

  1. बहोत ही सुंदर प्रस्तुती मोहन दा 🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼

    उत्तर द्याहटवा

तुमच्या बहुमोल समिक्षा आम्हास प्रोत्साहन देतात.

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