जब होता है इन्सान का जनम
तब उसकी तकदिर लिखी जाती है..!
इन्सान को वक्त से पहले और तकदिर
से ज्यादा कुछ नही मिलता..!
फिर क्यो आदमी इतना दौडधुप करता...!
जिन्दगी तु मुझे गम दे, खुशी दे,
मगर किसीके सामने हाथ फैलाने की नौबत न दे..!
दिल की कलम से लिखता हु....!
मन की शाई से लिखता हु...!
शब्दो मे जिता हु...!
शब्दो मे मरता हु...!
शाहिरी मे.... मै अपनी जिन्दगानी लिखता हु.!
अब सबके लिये.....!
रंजो गम के पहाड मिले..!
फुल के जगह काटे मिले..!
न डगमगाना, न हार मानना..!
वो तो अपना साहस,मन, और अपना धैर्य टटोलने को मिले...!
मै आपका शुक्रगुजार हु..!
जो मुझे आप जैसे लोग मिले..!
बरसात दु:खो की जीवन मे हो जाए..!
खुशियाॅ दुर चली जाऐ..!
हार न मानना कभी....!
ना जान कब कहाॅ..!
कोई मोड पर जिन्दगी
हसती मिल जाए...!
धन्यवाद!
मोहन सोमलकर 🙏🙏🙏🙏

खूप खूप मस्त रचना अप्रतिम sr...👌👌👌🌺🌹🌹🌺💗
उत्तर द्याहटवाधन्यवाद सुरज 🙏😊
हटवाबहोत खुब ��������
उत्तर द्याहटवाधन्यवाद गणेश दा
हटवाबहोत खूब मोहनजी 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻
उत्तर द्याहटवाधन्यवाद रंजुजी🙏😊
हटवाबोहोत खूब लीखा है जी आपणे....👌👌👌
उत्तर द्याहटवा💐💐💐प्रेम कवु...
धन्यवाद देव सर🙏🙏🍁
हटवाबहुत खूब सर 👌👌👌👌👌👌👌
उत्तर द्याहटवाधन्यवाद राजश्री मॅम 🙏🙏🙏🍁👍
हटवा