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| शाख से फुल गिरे |
शाख से कोई फुल गिरे
मानो कोई भुल हुई
ऑख से कोई आसू गिरे
मानो कोई मोती गिरे
किसी की उलझनोको सुलझावो जरा
सुलझते जाओ उलझनो मे उसे तुम्हारा सहारा मिला...!
मोहन सोमलकर
>तपुडा साहित्य मंच आयोजित साहित्य निर्मितीसाठी प्रेरणा व मार्गदर्शन मिळावे करिता लेखन उपक्रम *विषय- विठूची वारी (अभंग) शीर्षक:- माझ...
Kya baat hai ....masta👌👍✍️
उत्तर द्याहटवाधन्यवाद मानसीजी
हटवावाह!!! बहोत खूब
उत्तर द्याहटवाधन्यवाद ताई
हटवाशानदार पेशकश 👌🏼👌🏼
उत्तर द्याहटवाधन्यवाद ताई
हटवा