आदमी( पुरुष) की तीन माॅ ये होती है..!
एक जो हमे जनम देती है...!
पालती है.....!
पोसती है..!
बडा करती है...!
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दुसरी अपनी पत्नी होती..!
उसमेभी अपने माॅ का रुप है..!
जो जीवनभर हमे समजती,सहती है..!
अपने साथ जिन्दगी बिताती है..!
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तिसरी अपनी बिटियाॅ रानी है
जो बुढापे मे अपनी लाठी होती है..!
सहारा होती, अपने को बच्चे जैसे संभालती..!
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यही जिन्दगी है....!
You people got it.,...!
😊😊😊😊😊😊😊😊🙏💥😅😅💦
मोहन सोमलकर 🙏🍁

अगदी खरं आहे....सुंदर रचना..👌👍🍫✍️🌹
उत्तर द्याहटवाधन्यवाद मानसीजी🙏🙏🍁
उत्तर द्याहटवाअगदी खरंय सर👌👌👌👌👌
उत्तर द्याहटवासही कसा जी... सुंदर रचना!👌👌👌
उत्तर द्याहटवा